उल्यारु जिकुड़ि मिठ्ठु बोलणुं बच्याणुं।

 

उल्यारु जिकुड़ि मिठ्ठु बोलणुं बच्याणुं।

जुगराज रंयां 🙏तोंका शरण छो पाणुं।।

 

ये कोरोनाकाल मा भ्यंडों कु रोट्टी छिन ग्याई।

इना बि छन धरती मा जोलुं डालु बणिक छैल द्याई।।

 

लगाई छायादार डाला,फल - फूल और बुरांश ।

धरती घर-आंगन हैरि करि मन खुश है ग्याई।।

 

जन - जन गों - बाटु का दुखड़ा सुणिं बांधि फंची।

अपुण तन-मन धन दगड्यों दगड़ लोगों सेवा काई।।

 

आज धाद लगांणां छन जन गौं बाटु वोंकि सेवा मा।

वो समर्पित,छवटा -बड़ा दीनों कु सारु शरण है ग्याई।।,

 

सर्रा बखलि ,गौं ,ब्लाक,जिला ,राज्य देश मा ।

वोंका छवीं बत भलै,कविता,गीत ग़ज़ल बणिं ग्याई ।।

 

© प्रमिला रावत